Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 16.17

सा प्रहृष्टा महाराजम् हितकामानुवर्तिनी ।
जननी चार्थकामा मे केकयाधिपतेस्सुता ॥२-१६-१७॥

पूरा अध्याय