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वाल्मीकि रामायण 14.52

विराजमानो वपुषा मेरोरिव दिवाकरः ।
सोमसूर्यौ च काकुत्थ्स शिववैश्रवणावपि ॥२-१४-५२॥

पूरा अध्याय