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वाल्मीकि रामायण 14.51

बोधयत्यद्य पृथिवीं तथा त्वाम् बोधयाम्यहम् ।
उत्तिष्ठाशु महाराज कृतकौतुकमङ्गLअः ॥२-१४-५१॥

पूरा अध्याय