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वाल्मीकि रामायण 14.4

सम्श्रुत्य शैब्यः श्येनाय स्वाम् तनुम् जगती पतिः ।
प्रदाय पक्षिणो राजन् जगाम गतिम् उत्तमाम् ॥२-१४-४॥

पूरा अध्याय