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वाल्मीकि रामायण 12.78

गीतशब्देन सम्रुध्य लुब्धो मृगमिवावधीः ।
अनार्य इति मामार्याः पुत्रविक्रायिकम् ध्रुवम् ॥२-१२-७८॥

पूरा अध्याय