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वाल्मीकि रामायण 12.77

रूपिणीम् विषसम्युक्ताम् पीत्वेव मदिराम् नरह् ।
अनृतैर्बहु माम् सान्वैःसा न्त्वयन्ती स्म स्मभाषसे ॥२-१२-७७॥

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