ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 1212.37वाल्मीकि रामायण 12.37इति दुःखाभिसन्तप्तम् विलपन्तमचेतनम् । घूर्णमानम् महाराजम् शोकेन समभिप्लुतम् ॥२-१२-३७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय