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वाल्मीकि रामायण 118.1

सा त्वेवमुक्ता वैदेही त्वनसूया ऽनसूयया ।
प्रतिपूज्य वचो मन्दं प्रवक्तुमुपचक्रमे ॥ २.११८.१॥

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