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वाल्मीकि रामायण 11.21

तत्प्रतिश्रुत्य धर्मेण न चेद्दास्यसि मे वरम् ।
अद्यैव हि प्रहास्यामि जीवितं त्वद्विमानिता ॥२-११-२१॥

पूरा अध्याय