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वाल्मीकि रामायण 107.14

एवं राजर्षयः सर्वे प्रतीता राजनन्दन ।
तस्मात् त्राहि नरश्रेष्ठ पितरं नरकात् प्रभो ॥ २.१०७.१४॥

पूरा अध्याय