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वाल्मीकि रामायण 106.20

कश्च प्रत्यक्षमुत्सृज्य संशयस्थमलक्षणम् ।
आयतिस्थं चरेद्धर्मं क्षत्त्रबन्धुरनिश्चितम् ॥ २.१०६.२०॥

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