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वाल्मीकि रामायण 105.40

स स्वस्थो भव माशोचीर्यात्वा चावस तां पुरीम् ।
तथा पित्रा नियुक्तो ऽसि वशिना वदतां वर ॥ २.१०५.४०॥

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