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वाल्मीकि रामायण 105.24

नन्दन्त्युदित आदित्ये नन्दन्त्यस्तमिते रवौ ।
आत्मनो नावबुध्यन्ते मनुष्या जीवितक्षयम् ॥ २.१०५.२४॥

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