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वाल्मीकि रामायण 105.12

तवा ऽनुयाने काकुत्स्थ मत्ता नर्दन्तु कुञ्जराः ।
अन्तःपुरगता नार्यो नन्दन्तु सुसमाहिताः ॥ २.१०५.१२॥

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