Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 103.12

चतुरन्तां महीं भुक्त्वा महेन्द्रसदृशो विभुः ।
कथमिङ्गुदिपिण्याकं स भुङ्क्ते वसुधाधिपः ॥ २.१०३.१२॥

पूरा अध्याय