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वाल्मीकि रामायण 10.21

देव देवी भृशं कृद्धा क्रोधागारमभिद्रुता ।
प्रतीहार्या वचः श्रुत्वा राजा परमदुर्मनाः ॥२-१०-२१॥

पूरा अध्याय