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वाल्मीकि रामायण 10.20

यथापुरमविज्ञाय स्वार्थलिप्सुमपण्डिताम् ।
प्रतीहारी त्वथोवाच संत्रस्ता तु क्R^ताञ्जलिः ॥२-१०-२०॥

पूरा अध्याय