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वाल्मीकि रामायण 1.39

महीधरसमो धृत्यां मत्तश्च गुणवत्तरः ।
महीमहमिमां कृत्स्नामधितिष्ठन्तमात्मजम् ॥२-१-३९॥

पूरा अध्याय