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वाल्मीकि रामायण 68.3

बद्ध अंजलि पुटाः सर्वे दूता विगत साध्वसाः ।
राजानम् प्रश्रितम् वाक्यम् अब्रुवन् मधुर अक्षरम् ॥१-६८-३॥

पूरा अध्याय