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वाल्मीकि रामायण 62.22

राज सिंह महाबुद्धे शीघ्रम् गच्छावहे वयम् ।
निवर्तयस्व राजेन्द्र दीक्षाम् च समुदाहर ॥१-६२-२२॥

पूरा अध्याय