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वाल्मीकि रामायण 62.21

शुनःशेपो गृहीत्वा ते द्वे गाथे सुसमाहितः ।
त्वरया राज सिंहम् तम् अंबरीषम् उवाच ह ॥१-६२-२१॥

पूरा अध्याय