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वाल्मीकि रामायण 61.23

गवाम् शत सहस्रेण शुनःशेपम् नरेश्वरः ।
गृहीत्वा परम प्रीतो जगाम रघुनंदन ॥१-६१-२३॥

पूरा अध्याय