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वाल्मीकि रामायण 5.17

गृह गाढाम् अविच्छिद्राम् सम भूमौ निवेशिताम् ।
शालि तण्डुल संपूर्णाम् इक्षु काण्ड रसः उदकाम् ॥१-५-१७॥

पूरा अध्याय