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वाल्मीकि रामायण 5.16

चित्रम् अष्टापद आकाराम् वर नारी गणैर् युताम् ।
सर्व रत्न समाकीर्णाम् विमान गृह शोभिताम् ॥१-५-१६॥

पूरा अध्याय