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वाल्मीकि रामायण 48.26

गृहीत समिधम् तत्र स कुशम् मुनि पुंगवम् ।
दृष्ट्वा सुर पतिः त्रस्तो विषण्ण वदनो अभवत् ॥१-४८-२६॥

पूरा अध्याय