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वाल्मीकि रामायण 48.25

देव दानव दुर्धर्षम् तपो बल समन्वितम् ।
तीर्थ उदक परिक्लिन्नम् दीप्यमानम् इव अनलम् ॥१-४८-२५॥

पूरा अध्याय