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वाल्मीकि रामायण 45.3

क्षण भूत इव नौ रात्रिः संवृत्त इयम् परंतप ।
इमाम् चिंतयतोः सर्वम् निखिलेन कथाम् तव ॥१-४५-३॥

पूरा अध्याय