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वाल्मीकि रामायण 45.2

अति अद्भुतम् इदम् ब्रह्मन् कथितम् परमम् त्वया ।
गंगा अवतरणम् पुण्यम् सागरस्य अपि पूरणम् ॥१-४५-२॥

पूरा अध्याय