ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 3535.19वाल्मीकि रामायण 35.19प्रतिगृह्य त्रिलोक अर्थम् त्रिलोक हित कांक्षिणः । गंगाम् आदाय ते अगच्छन् कृतार्थेन अंतरात्मना ॥१-३५-१९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय