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वाल्मीकि रामायण 33.21

तम् आहूय महातेजा ब्रह्मदत्तम् महीपतिः ।
ददौ कन्या शतम् राजा सुप्रीतेन अंतरात्मना ॥१-३३-२१॥

पूरा अध्याय