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वाल्मीकि रामायण 25.18

नृशंसम् अनृशंसम् वा प्रजा रक्षण कारणात् ।
पातकम् वा सदोषम् वा कर्तव्यम् रक्षता सदा ॥१-२५-१८॥

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