ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 2424.5वाल्मीकि रामायण 24.5तत्र शुश्राव वै शब्दम् तोय संरम्भ वर्धितम् । मध्यम् आगम्य तोयस्य तस्य शब्दस्य निश्चयम् ॥१-२४-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय