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वाल्मीकि रामायण 18.53

पात्र भूतोऽसि मे ब्रह्मन् दिष्ट्या प्राप्तोऽसि मानद ।
अद्य मे सफलम् जन्म जीवितम् च सु जीवितम् ॥१-१८-५३॥

पूरा अध्याय