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ऋग्वेद 114.3

स॒प्त दिशो॒ नाना॑सूर्याः स॒प्त होता॑र ऋ॒त्विज॑ः ।
दे॒वा आ॑दि॒त्या ये स॒प्त तेभि॑ः सोमा॒भि र॑क्ष न॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥३॥

पूरा अध्याय