ग्रंथऋग्वेदमण्डल 9सूक्त 113113.2ऋग्वेद 113.2आ प॑वस्व दिशां पत आर्जी॒कात्सो॑म मीढ्वः । ऋ॒त॒वा॒केन॑ स॒त्येन॑ श्र॒द्धया॒ तप॑सा सु॒त इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय