Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 104.4

अ॒स्मभ्यं॑ त्वा वसु॒विद॑म॒भि वाणी॑रनूषत । गोभि॑ष्टे॒ वर्ण॑म॒भि वा॑सयामसि ॥४॥

पूरा अध्याय