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ऋग्वेद 87.3

आ वां॒ विश्वा॑भिरू॒तिभि॑ः प्रि॒यमे॑धा अहूषत । ता व॒र्तिर्या॑त॒मुप॑ वृ॒क्तब॑र्हिषो॒ जुष्टं॑ य॒ज्ञं दिवि॑ष्टिषु ॥३॥

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