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ऋग्वेद 87.2

पिब॑तं घ॒र्मं मधु॑मन्तमश्वि॒ना ऽऽब॒र्हिः सी॑दतं नरा । ता म॑न्दसा॒ना मनु॑षो दुरो॒ण आ नि पा॑तं॒ वेद॑सा॒ वय॑ः ॥२॥

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