ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 7878.5ऋग्वेद 78.5नकी॒मिन्द्रो॒ निक॑र्तवे॒ न श॒क्रः परि॑शक्तवे । विश्वं॑ शृणोति॒ पश्य॑ति ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय