ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 7878.4ऋग्वेद 78.4नकीं॑ वृधी॒क इ॑न्द्र ते॒ न सु॒षा न सु॒दा उ॒त । नान्यस्त्वच्छू॑र वा॒घत॑ः ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय