ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 6060.4ऋग्वेद 60.4अद्रो॑घ॒मा व॑होश॒तो य॑विष्ठ्य दे॒वाँ अ॑जस्र वी॒तये॑ । अ॒भि प्रयां॑सि॒ सुधि॒ता व॑सो गहि॒ मन्द॑स्व धी॒तिभि॑र्हि॒तः ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय