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ऋग्वेद 44.30

पु॒राग्ने॑ दुरि॒तेभ्य॑ः पु॒रा मृ॒ध्रेभ्य॑ः कवे । प्र ण॒ आयु॑र्वसो तिर ॥३०॥

पूरा अध्याय