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ऋग्वेद 31.17

नकि॒ष्टं कर्म॑णा नश॒न्न प्र यो॑ष॒न्न यो॑षति । दे॒वानां॒ य इन्मनो॒ यज॑मान॒ इय॑क्षत्य॒भीदय॑ज्वनो भुवत् ॥१७॥

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