ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 2424.6ऋग्वेद 24.6आ त्वा॒ गोभि॑रिव व्र॒जं गी॒र्भिॠ॑णोम्यद्रिवः । आ स्मा॒ कामं॑ जरि॒तुरा मन॑ः पृण ॥६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय