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ऋग्वेद 24.3

स न॒ः स्तवा॑न॒ आ भ॑र र॒यिं चि॒त्रश्र॑वस्तमम् । नि॒रे॒के चि॒द्यो ह॑रिवो॒ वसु॑र्द॒दिः ॥३॥

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