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ऋग्वेद 103.14

आग्ने॑ याहि म॒रुत्स॑खा रु॒द्रेभि॒ः सोम॑पीतये । सोभ॑र्या॒ उप॑ सुष्टु॒तिं मा॒दय॑स्व॒ स्व॑र्णरे ॥१४॥

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