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ऋग्वेद 103.11

उदि॑ता॒ यो निदि॑ता॒ वेदि॑ता॒ वस्वा य॒ज्ञियो॑ व॒वर्त॑ति । दु॒ष्टरा॒ यस्य॑ प्रव॒णे नोर्मयो॑ धि॒या वाज॒ सिषा॑सतः ॥११॥

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