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ऋग्वेद 81.2

उदु॒स्रिया॑ः सृजते॒ सूर्य॒ः सचाँ॑ उ॒द्यन्नक्ष॑त्रमर्चि॒वत् ।
तवेदु॑षो॒ व्युषि॒ सूर्य॑स्य च॒ सं भ॒क्तेन॑ गमेमहि ॥२॥

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