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ऋग्वेद 59.3

न॒हि व॑श्चर॒मं च॒न वसि॑ष्ठः परि॒मंस॑ते । अ॒स्माक॑म॒द्य म॑रुतः सु॒ते सचा॒ विश्वे॑ पिबत का॒मिन॑ः ॥३॥

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