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ऋग्वेद 55.2

यद॑र्जुन सारमेय द॒तः पि॑शङ्ग॒ यच्छ॑से । वी॑व भ्राजन्त ऋ॒ष्टय॒ उप॒ स्रक्वे॑षु॒ बप्स॑तो॒ नि षु स्व॑प ॥२॥

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